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णमो अरिहंताणं | णमो सिद्धाणं | णमो आयरियाणं | णमो उवज्झायणं | णमो लोए सव्व साहूणं | एसो पंच णमोक्कारो, सव्व पावप्प णासणो मंगलाणं च सव्वेसिं, पडमम हवई मंगलं |
Bhajan | Aarti | Pooja | Stotra | Amritvani | Miscellaneous

रत्नत्रय गुण से मण्डित जो कर्म रहित भगवान कहें ।

विश्व रूप को एक समय में अवलोकन कर जान रहे ||

मन- वाच- तन को अक्षत करके पञ्च- प्रभु को करे प्रणाम |

पठन करे जिनवाणी का हरने को अपना अज्ञान ||

अरहंत देव की दिव्य ध्वनि से जो भी निकली है वाणी |

स्यादवाद अनेकांत मयी वह कहलाती है जिनवाणी ||

नय निक्षेप तत्व पदार्थ का इसमें पूर्ण विवेचन है |

भव तरने की बात इसी में संशय लेश न हैं ||


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